सूर्य की परिक्रमा करती हुई पृथ्वी अपनी ऊर्जा क्यों नहीं खोती?

भौतिकी की कुछ बातों को समझना कठिन है क्योंकि वे हमारे कॉमन सेंस, सहज ज्ञान और दिन-प्रतिदिन के प्रेक्षणों-निरीक्षणों के विरुद्ध होती हैं.

उदाहरण के लिए हम न्यूटन का प्रथम नियम लेते हैं जिसके अनुसार प्रत्येक पिंड तब तक अपनी विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में रहता है जब तक कोई बाह्य बल उसे अन्यथा व्यवहार करने के लिए विवश नहीं करता. इसे जड़त्व का नियम भी कहा जाता है.

यह नियम हमारे दैनिक जीवन के अनुभवों का निषेध करता है. हम देखते हैं कि चल रही वस्तुएं रुक जाती हैं. आप किसी चीज (सिक्का, पेन, कप) को टेबल पर धक्का देते हैं तो वह कुछ दूर जाकर रुक जाता है. आप किसी बॉल को फेंकते हैं तो वह भी दूर जाकर रुक जाती है. हर चीज चलती ही नही रहती बल्कि रुक जाती है. न्यूटन के प्रथम नियम को भलीभांति समझने में समय लगता है क्योंकि यह हमारे दैनिक जीवन के अनुभवों पर खरा नहीं उतरता. हालांकि हम घर्षण के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी गणना करना सरल नहीं है. यही कारण है कि भौतिकी कभी-कभी कठिन लगने लगती है.

असल बात यह है कि भौतिकी के अधिकांश नियम उन घटनाओं व चीजों को देखकर बनाए गए थे जहां घर्षण अत्यल्प या न-के-बराबर होता है, जैसे कि ग्रहों के परिक्रमा पथ और गिरते हुए भारी गोले जैसी वस्तुएं. न्यूटन को यह प्रतीत हुआ कि चंद्रमा पृथ्वी पर उसी बल से से गिर रहा है जैसे कोई सेब धरती पर गिरता है.

जब हम स्कूल या कॉलेज की प्रयोगशाला में भौतिकी के नियमों का सत्यापन करते हैं तो हम बहुत महंगे और विशिष्ट उपकरणों का उपयोग करते हैं जिनमें घर्षण लगभग शून्य होता है. हमें ऐसा करने की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि भौतिकी के सरल सूत्र केवल कुछ परिस्तिथियों में ही जांचे जा सकते हैं.

भौतिकशास्त्रियों को घर्षण की अवधारणा से हमेशा समस्या होती है. यदि आपको भी घर्षण से कोई व्यावहारिक कठिनाई हो रही है तो आपकी समस्या का समाधान कोई भौतिकशास्त्री नहीं बल्कि इंजीनियर कर सकता है. इजीनियर्स अक्सर ही घर्षण से जुड़ी चीजों पर काम करते रहते हैं जबकि भौतिकशास्त्री इसकी ज्यादा चर्चा नहीं करते. आप भौतिकी की कोई पाठ्य-पुस्तक देखेंगे तो पाएंगे कि उनमें घर्षण के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं होती.

भौतिकी के नियम घर्षण की अनुपस्तिथि में बहुत अच्छे से काम करते हैं. इसके दो सबसे अच्छे उदाहरण हैं अंतरिक्ष और परमाणु. इन दोनों के अतिरिक्त अन्य जो भी चीजें हैं वहां भौतिकी के नियमों का सत्यापन करना घर्षण से उत्पन्न होनेवाली परिस्तिथियों के कारण कठिन हो जाता है. ऐसे में हमारे निष्कर्ष महज़ अनुमान ही रह जाते हैं.

यह तो रही भौतिकी की बात. अब हम अपने प्रश्न के उत्तर पर आते हैं. पृथ्वी चूंकि अंतरिक्ष में स्थित है इसलिए वहां निर्वात की उपस्तिथि के कारण घर्षण लगभग शून्य हो जाता है. यही कारण है कि सूर्य की परिक्रमा करती हुई पृथ्वी अपनी ऊर्जा नहीं खोती. अंतरिक्ष में ऐसा कुछ नहीं है जिसे पृथ्वी अपनी ऊर्जा अंतरित या ट्रांसफ़र कर सके. (image credit)

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