हम मंगल ग्रह पर पेड़-पौधे क्यों नहीं उगा सकते?

पृथ्वी को छोड़कर हमारे सौरमंडल के बाकी अन्य ग्रहों में से केवल मंगल ही वह एकमात्र ग्रह है जिसकी सतह पृथ्वी से बहुत अधिक मिलती-जुलती है. इसका आकार हांलाकि पृथ्वी से बहुत छोटा है लेकिन शुक्र ग्रह की तुलना में इसका तापमान हमारे लिए अधिक अनुकूल है. शुक्र ग्रह का आकार पृथ्वी के लगभग समान है लेकिन इसकी सतह का प्रचंड तापमान और विषैला वातावरण किसी भी प्रकार के जीवन के लिए सर्वथा अनुपयुक्त है.

यह सच है कि चंद्रमा की तुलना में मंगल ग्रह हमारे लिए अधिक रहने योग्य (habitable) है. यदि मंगल ग्रह की मिट्टी पृथ्वी की मिट्टी के समान है तो क्या हम वहां पेड़-पौधे उगा सकते हैं? क्या वे पेड़-पौधे वहां ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि करके अधिक जीवनोपयोगी वातावरण का निर्माण कर सकते हैं? क्या यह संभव है? यदि यह संभव नहीं है तो इसके कारण क्या हैं? इस लघु लेख में हम इसकी चर्चा करेंगे.

सबसे पहले तो आपको यह जनना ज़रूरी है कि पेड़-पौधों के बढ़ने की दर बहुत कम होती है और पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा के लिए पेड़-पौधों का योगदान बहुत कम है. पृथ्वी की अधिकांश ऑक्सीजन महासागरों से मिलती है. यह ऑक्सीजन समुद्रों में उगनेवाले सूक्ष्म पौधों से प्राप्त होती है जिन्हें फ़ाइटोप्लैंक्टन (phytoplankton) कहते हैं. ये सूक्ष्म पौधे पानी की सतह पर तैरते और धारा के साथ बहते रहते हैं. मंगल ग्रह पर द्रव पानी की उपस्थिति के प्रमाण नहीं मिले हैं.

दूसरी बात ये है कि मंगल ग्रह पर हवा नहीं है. ठीक है, ठीक है… आप कहेंगे कि मंगल ग्रह पर हवा है लेकिन इसकी सतह पर हवा का दबाव 0.087 psi (6.0 mbar) है जबकि पृथ्वी पर समुद्र की सतह पर हवा का दबाव 14.69 psi (1.013 bar) है. इस तरह मंगल ग्रह का वातावरण पृथ्वी की अपेक्षा बहुत विरल है और यह न-के-बराबर है.

तीसरी बात यह है कि मंगल ग्रह पर पृथ्वी के जितना प्रकाश उपलब्ध नहीं है. मंगल ग्रह को सूर्य का प्रकाश पृथ्वी की तुलना में आधे से भी कम मिलता है और जो भी प्रकाश उसे मिलता है वह वायुमंडल के विरल होने के कारण फ़िल्टरर्ड नहीं होता. इसलिए मंगल पर हम जो भी पौधा लगाएंगे उसकी पत्तियां संरक्षित वातावरण से निकलते ही पीली पड़कर मुरझा जाएंगी. पृथ्वी पर तो वायुमंडल की ऊपरी तहों पर ओज़ोन की उपस्थिति के कारण हम तक बहुत कम पराबैंगनी किरणें पहुंचती हैं परंतु मंगल ग्रह पर हमें यह सुविधा प्राप्त नहीं है. हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आते ही पेड़-पौधों की पत्तियां मर जाएंगी. बहुत कम मात्रा में पराबैंगनी किरणें पेड़-पौधों के लिए लाभप्रद हैं लेकिन वे इन्हें एक सीमा से अधिक नहीं सह सकते.

मंगल ग्रह के वातावरण के संपर्क में आते ही पौधों की पत्तियां अपना पानी खो देंगी क्योंकि वहां का वातावरण लगभग निर्वात के समान है. सबसे पहले उनमें मौजूद पानी कम तापमान में जम जाएगा, फिर यह जमा हुआ पानी सूर्य के प्रकाश में ऊर्ध्वपातित (sublimate) हो जाएगा.

और क्या आप यह बात जानते हैं कि मंगल ग्रह की अधिकांश भूमि पेड़-पौधे उगाने के लिए अनुपयुक्त है? मंग्रह ग्रह की अधिकांश भूमि में विषैले तत्व हैं और लौह अयस्क की भरमार है जिससे यह ग्रह लाल दिखता है.

मंगल ग्रह वास्तव में बहुत सुंदर और अद्भुत ग्रह है. मैं मंगल पर जाना चाहता हूं. ईलोन मस्क भी मंगल पर मनुष्यों को भेजना चाहता है. ईलोन की कंपनी स्पेस-एक्स मंगल तक जाने के लिए बड़े रॉकेट विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. हो सकता है कि उन्हें एक अच्छा अंतरिक्ष यान बनाने में कामयाबी मिल जाए. लेकिन ईलोन या नासा यो कोई भी स्पेस एजेंसी जिन व्यक्तियों को वहां भेजेगी उन्हें पूरे समय कांच से ढंके संरक्षित वातावरण में ही रहना पड़ेगा. मंगल ग्रह के वातावरण को पृथ्वी के अनुकूल बनाना लगभग असंभव कार्य है इसलिए वहां प्रयोग करनेवाले अंतरिक्ष यात्रियों को ही नहीं बल्कि वहां रहनेवाली भावी पीढ़ियों को भी सदैव संरक्षित वातावरण में ही रहना पड़ेगा. (image credit)

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