क्या नासा ने सच में अंतरिक्ष में पेन उपयोग करने के लिए लाखों डॉलर खर्च किए?

अंतरिक्ष से जुड़ी बहुत सी सच्ची-झूठी कहानियों में से एक यह है जिसमें लोग मानते हैं कि नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पेन विकसित करने पर लाखों डॉलर खर्च किए जबकि सोवियत संघ ने सिर्फ साधारण पेंसिलें उपयोग करके काम चला लिया.

शुरुआत में जब सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में मनुष्यों को भेजा तो वे वहां पेंसिलों का उपयोग करते थे. अमेरिका ने भी मरक्युरी और जेमिनी मिशनों पर 1968 के पहले पेंसिलों का उपयोग किया. कभी-कभी पेंसिलों की नोक टूटकर गुरुत्वहीनता में तैरती हुई किसी मशीन में चली जाती थी. वह किसी की आंख में या नाक में भी जा सकती थी और इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट भी कर सकती थी. लकड़ी और ग्रेफाइट से बनी पेंसिलें शुद्ध ऑक्सीजन के संपर्क में आकर तेजी से आग भी पकड़ सकती थीं. अंतरिक्ष यानों में ऐसा कोई भी पदार्थ ले जाने की अनुमति नहीं होती जो कंटामिनेशन (संदूषण) कर सकता हो.

पॉल फिशर की कंपनी ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षित पेन विकसित करने की संभावना देखी और जुलाई 1965 में एक प्रेशराइज्ड बॉल पेन बनाया जिसकी इंक दोनों ओर से सील्ड थी. इसकी इंक 200°C तक जल नहीं सकती थी. नासा ने इन पेनों के सैंपल का अच्छे से परीक्षण किया. सारे परीक्षणों को पास करने के बाद अमेरिकी और अन्य देशों के अंतरिक्ष यात्री तभी से इन पेनों का उपयोग कर रहे हैं. इन पेनों के रिसर्च और डेवलपमेंट पर सारा खर्च पॉल फिशर ने किया.

अपोलो 1 में आग लगने के बाद (जिसमें 3 अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई थी) नासा को ऐसे पेन की ज़रूरत थी जो 100% ऑक्सीजन में भी नहीं जले और निम्नलिखित परिस्थितियों में भी काम करेः

  1. यह निर्वात में चले
  2. गुरुत्वहीनता में चले
  3. सूर्य की रोशनी में तापमान +150°C तथा छांव के तापमान -120°C में भी काम करे

नासा ने फिशर कंपनी के पेन को -50°C में टेस्ट करके देखा. चूंकि पेन में गुप्त ऊष्मा बची रहती थी इसलिए वह इस तापमान पर भी कुछ देर तक काम करता रहता था.

पॉल फिशर के पेनों के उपयोग से पहले नासा ने ह्यूस्टन में टाइकैम इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से मैकेनिकल पेंसिलें बनवाईं. ऐसी 34 पेंसिलों के लिए कंपनी को कुल $4,382.50 का भुगतान किया गया अर्थात एक पेंसिल $128.89 की पड़ी. इतनी महंगी पेंसिलें खरीदने पर बहुत विवाद हुआ इसलिए नासा ने इन्हें उपयोग करने का विचार त्याग दिया.

कहा जाता है कि पॉल फिशर की कंपनी ने अपने पेन डेवलप करने पर लगभग दस लाख डॉलर खर्च किए. पुराने विवाद के कारण नासा शुरुआत में इन पेन को लेने में हिचक रहा था. टेस्टिंग के बाद नासा ने सही पाए जाने पर ऐसे 400 पेन अपोलो प्रोजेक्ट के लिए $6 प्रति पेन की दर से खरीदे. सोवियत ने भी अपने सोयूज़ मिशनों के लिए 100 पेन और 1,000 इंक कार्ट्रिज खरीदीं. आज भी अंतरिक्ष में लोग इन्हीं पेन का इस्तेमाल करते हैं.

इसलिए यह कहना गलत है कि नासा ने अंतरिक्ष पेन की खोज पर लाखों डॉलर बर्बाद किए जबकि सोवियत सिर्फ पेंसिल से काम चलाते रहे. (image credit)

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s